"मेरे अहसास" MY QUOTES
- Archana Anupriya

- Oct 4, 2020
- 1 min read
पलकों पर ख्वाहिशों के घरौंदे सजते हैं, बनते नहीं..
हकीकत की दीवारें ख्वाबों के ईंटों से नहीं बनतीं...
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तन्हाई का सफर मेरा और
तुम्हारा अचानक यूँ मिल जाना...
पन्ने पलटते किताब में जैसे
रखा हुआ कोई फूल हो जैसे...
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समाज में किसी को फुरसत नहीं है
अब किसी और के लिए...
आत्ममुग्धता का दौर है साहब,
लोग व्यस्त हैं अपनेआप में...
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"ऊँचाइयाँ" लम्बाई में कहाँ होती हैं..
जो गहरा होता है,वही ऊँचा होता है..
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सदियों की चाहत मेरी...
इश्क नहीं, इबादत है कोई...
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मासूम आईना चेहरा दिखाकर खुश होता रहा...
चालाक इन्सानों ने चढ़ा लिए चेहरे पर नया चेहरा...
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बहुत नेकदिल होना भी ठीक नहीं है दोस्तों...
बहुत पत्थर खाते हैं वो पेड़,जो मीठे फल देते हैं...
©®अर्चना अनुप्रिया



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