डायरी प्रियामन की..
- Archana Anupriya

- Mar 2
- 1 min read
कहीं रंग
कहीं जंग
कहीं ग्रहण दबंग
क्या अजीब नजारा बन गया है जहान में..
कहीं बातें
कहीं घातें
कहीं रंग भरी रातें
क्यों सितारों की जगह शोले दिखें आसमान में..
कहीं डर
कहीं क्षर
कहीं जल रहे घर
क्यों हीनता संवेदना की भरी इंसान में ?
©अर्चना अनुप्रिया
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