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भावों की चयनिका by Archana Anupriya

भावों की चयनिका
- Archana Anupriya
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"जीवन और पर्यावरण"
“जीवन और पर्यावरण” कल्पना कीजिए 2050 की गर्मी…तापमान 52°C से 60डिग्री सेल्सियस..आठ साल का कियान अपने दादू के साथ ‘सिटी सेंट्रल पार्क’ जाता है। बोर्ड पर लिखा था: Welcome to India’s Last Natural Tree — AC Zone Entry ₹500…कियान ने कांच के डोम के अंदर झांका। एक अकेला नीम का पेड़। उसके नीचे दादू बचपन में गिल्ली-डंडा खेलते थे। अब उसके चारों तरफ टिकट काउंटर, सेल्फी पॉइंट और Oxygen Bar था ..10 मिनट सांस लेने के पांच सौ रूपए। कियान पूछता है, "दादू, पेड़ तो फ्री में ऑक्सीजन देते थे न?

Archana Anupriya
14 hours ago7 min read


"अधिक आस्था तर्कशक्ति को क्षीण कर देती है"
"अधिक आस्था तर्कशक्ति को क्षीण कर देती है" आस्था,विश्वास,भक्ति तथा तर्क, विवेक,ज्ञान- ये सभी एक दूसरे के पूरक विचार हैं।बोलने,समझने और विश्लेषण की प्रक्रिया से गुजरते हुए सभी एक दूसरे से इस तरह से टकराते हैं कि असल अवधारणा कहीं और धरी रह जाती है और हम द्वंद्व और विवाद में फंसकर एक दूसरे पर आक्षेप करने में लग जाते हैं और भटकते रह जाते हैं। दरअसल,आस्था और तर्क विश्वास और विवेक के बीच की पतली रेखा है।तर्क दिमाग के माध्यम से चलता है और आस्था दिल को राह बनाती है। प्रश्न यह उठता

Archana Anupriya
May 307 min read


"हिंग्लिश का दौर है ब्रो.."
“हिंग्लिश का दौर है ब्रो..” आजकल अक्सर लोगों को, विशेषकर नयी पीढ़ी को कहते सुना जाता है..”हे ब्रो,चिल करो यार..हे सिस, तेरे एक्जाम की प्रीपेयरेशन कैसी चल रही है..वगैरह वगैरह..एक पंक्ति में हिंदी और अंग्रेजी..दोनो मिक्स..कुछ अजीब सा ही रूप लेकर बोली जा रही है आज की बोलचाल की भाषा। भाषाओं की खिचड़ी सी बन गयी है,पर मजे की बात है कि सभी बोल रहे हैं,समझ रहे हैं और एक नयी भाषा का गढ़न तेजी से हो रहा है।सच कहें तो कोई भी भाषा कभी स्थिर नहीं रहती। वो नदी की तरह बहती है और रास्ते में

Archana Anupriya
May 218 min read


"रोपाई से विदाई तक: धान भी बदले घर,बेटी भी"
“रोपाई से विदाई तक: धान भी बदले घर, बेटी भी” “बेटी और धान, दोनों ही लक्ष्मी हैं, दोनों ही सृष्टि का आधार हैं और दोनों की किस्मत लगभग एक सी है – जन्म एक जगह, जीवन दूसरी जगह”--यह कथन पुरबिया किसान जगेसर काका की है। सुनने में अजीब जरूर लगता है लेकिन उनकी बात सचमुच पते की है। धान का बीज जहां डाला जाता है, पौधा उगने पर उसे वहीं नहीं रहने दिया जाता। उखाड़कर नए खेत में रोप दिया जाता है। बेटी भी जिस घर में जन्म लेती है, ब्याह के बाद उसे नया घर बसाना पड़ता है। दोनों का घर बदलता है, प

Archana Anupriya
May 165 min read
"मदर्स-डे स्पेशल.."मां की हथेली"
"मदर्स डे स्पेशल: "माँ की हथेली" सुबह छः बजे अनन्या की फ्लाइट थी..दिल्ली से बैंगलोर। हाथ में बोर्डिंग पास, दिल में धुकधुकी। माँ ने रात 3 बजे उठकर पराठे बना दिए थे.. "फ्लाइट में क्या खाएगी, बाहर का मत खाना।" अनन्या झुंझला गई थी, "माँ, मैं 28 की हूँ। एयरपोर्ट पर कैफे है।" माँ बस मुस्कुरा दी। टिफिन में पराठे, आम का अचार और गुड़ का टुकड़ा — "मीठा खाकर जाना, सफर अच्छा जाता है।" एयरपोर्ट पर माँ ने उसे गले लगाया। अनन्या को लगा माँ कुछ कमजोर हो गई हैं। कंधे थोड़े झुक गए हैं। पर माँ

Archana Anupriya
May 103 min read
डायरी प्रियामन की..
कहीं रंग कहीं जंग कहीं ग्रहण दबंग क्या अजीब नजारा बन गया है जहान में.. कहीं बातें कहीं घातें कहीं रंग भरी रातें क्यों सितारों की जगह शोले दिखें आसमान में.. कहीं डर कहीं क्षर कहीं जल रहे घर क्यों हीनता संवेदना की भरी इंसान में ? ©अर्चना अनुप्रिया

Archana Anupriya
Mar 21 min read


"लुप्त होती धार्मिक परंपराएं"
“लुप्त होती धार्मिक परंपराएं” बदलते समय ने केवल समाज की व्यवस्था ही नहीं बदली है बल्कि, युगों से चले आ रहे धार्मिक रीति रिवाज और परंपराओं में भी बदलाव किया है। आजकल सनातन संस्कृति की चर्चा तो देश में जोर-शोर से हो रही है परंतु, सनातन संस्कृति के प्रतीक,धार्मिक रीति रिवाज और परंपराएं घटती जा रही हैं।सनातन के धार्मिक व्यवहार किसी विशेष पंथ से जुड़े नहीं हैं बल्कि ये मानव जीवन को बेहतर और संतुलित बनाने की प्रक्रिया हैं।यह वह रास्ता है,जो मानव जीवन के लिए हमेशा से जरुरी है और ह

Archana Anupriya
Feb 59 min read
"वकालत में महिलायें"
“भारतीय वकालत के क्षेत्र में स्त्रियों की भूमिका” भारतीय न्याय व्यवस्था देश के लोकतांत्रिक ढांचे की रीढ़ मानी जाती है, और इस व्यवस्था को मजबूत बनाने में महिलाओं की भूमिका आज अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रभावशाली बन चुकी है। एक समय था जब कानून और अदालतें पुरुष-प्रधान क्षेत्र मानी जाती थीं, लेकिन आज महिलाएँ न केवल इस क्षेत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही हैं, बल्कि नेतृत्व, संवेदनशीलता और नारीसुलभ दृष्टिकोण के साथ इसे अधिक मानवीय और संतुलित भी बना रही हैं। भारत में महिलाओं की वकालत

Archana Anupriya
Jan 65 min read
"बदल रहा है समय"
“बदल रहा है समय..” बदलाव प्रकृति का नियम है और समय के साथ बदलना जरूरी भी है।चीजें बदलती रहती हैं.. और बदलना अच्छा भी है क्योंकि समय के साथ चलना जरूरी है।अगर पीछे छूट गये तो या तो पीड़ा होगी या पीड़ा देने लग जायेंगे।भगवान ने भी इस बात पर जोर दिया है कि समय के लिए ,धर्म के लिए,अपने कर्म के लिए बदलना ही चाहिए।खुद भगवान भी अलग-अलग युग में रूप बदल-बदलकर आये। समय के हिसाब से ही ईश्वर भी अपने अवतार में बदलाव करके आये।त्रेतायुगीन अवतार में राक्षसों द्वारा फैलायी अव्यवस्था को दूर करने क

Archana Anupriya
Jan 16 min read
"ढाई अक्षर प्रेम के"
“ढाई अक्षर प्रेम के” अबकी श्रावण मास ने आते ही प्रेम के गुलाब बरसाये…पंखुड़ियां अभी भी मेरी रूह से चिपकी महक रही हैं।भोले बाबा ने इस...

Archana Anupriya
Aug 18, 20256 min read
"रक्षाबंधन"
"रक्षाबंधन" पूरे शहर में कर्फ्यू लगा था। सारी दुकानें बंद, स्कूल कॉलेज बंद... अजीब से हालात थे...यहाँ तक कि मंदिर-मस्जिद भी जाने की किसी...

Archana Anupriya
Aug 9, 20252 min read
"रोष प्रकृति का,दोष मनोवृत्ति का"
“रोष प्रकृति का,दोष मनुवृत्ति का” अभी उत्तराखंड के समाचार देखना शुरू ही किया था कि विज्ञापन आ गया।मन क्षुब्ध हो गया। फिर गूगल पर पढ़ना...

Archana Anupriya
Aug 8, 20254 min read
"युवा पीढ़ी के भटकाव को रोक सकते हैं स्वामी विवेकानंद जी के विचार"
“ युवा पीढ़ी के भटकाव को रोक सकते हैं स्वामी विवेकानंद जी के विचार” आज दुनिया के हर माता-पिता को इस बात से शिकायत है कि उनके बच्चे उनकी...

Archana Anupriya
Jul 3, 20257 min read
"जंगल की संसद"
"जंगल की संसद" वन की संसद का अधिवेशन था कई झमेलों का इमरजेंसी सेशन था सारे पशु पक्षियों का मानो लगा हुआ था मेला... हर एक अपनी शिकायतों ...

Archana Anupriya
Jun 27, 20253 min read
डायरी मन की--"हादसा? लापरवाही?साजिश?बदला?या संतुलन?"
हादसा? लापरवाही?साजिश? बदला?या संतुलन? आये दिन जो कुछ भी अच्छा या बुरा घटित होता है उसके पीछे मनुष्यों के कर्म उत्तरदायी हैं या ईश्वर की...

Archana Anupriya
Jun 14, 20254 min read
डायरी मन की-"अर्द्धशतक"
"अर्द्धशतक ” उम्र क्या है? गिनती है उन दिनों की, जिस दिन से हम इस धरती पर आए हैं। जो जितना पुराना होता जाएगा,वह जीवन का हर रुख उतना ही...

Archana Anupriya
Jun 6, 20252 min read
"ठुकरा के मेरा प्यार "
*"ठुकरा के मेरा प्यार *"*- *एक समीक्षा** ठुकरा के मेरा प्यार सीरीज़ एक हिंदी ड्रामा है,जो डिज्नी+ हॉटस्टार पर दिखाया जा रहा है।इसका...

Archana Anupriya
Feb 24, 20254 min read


"झरोखा जिंदगी का"
१)धड़कते दिल की इमारत में न इबादत है,न बंदगी.. ईंट -पत्थर के मंदिर -मस्जिद में खुदा ढ़ूंढ़ते हैं लोग.. २)मजबुरियां सिखा देती हैं और...

Archana Anupriya
Dec 6, 20242 min read


"सीने में जलन..."
“दिल्ली और प्रदूषण” सीने में जलन, आँखों में तूफ़ान सा क्यों है, इस शहर में हर शख़्स परेशान सा क्यों है...? 1978 में आई फिल्म 'गमन' का यह...

Archana Anupriya
Dec 2, 20247 min read
रील की बीमारी, रीयल जीवन पर भारी "
“रील की बीमारी,रीयल जीवन पर भारी" अभी हाल के दिनों में शिक्षक दिवस के अवसर पर एक अजीब सा वीडियो वायरल हो गया। किसी शिशु विद्यालय में...

Archana Anupriya
Nov 3, 20248 min read
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