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भावों की चयनिका by Archana Anupriya

भावों की चयनिका
- Archana Anupriya
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हमारे कालेज का हौस्टल और परीक्षा की तैयारी”
“हमारे कालेज का हौस्टल और परीक्षा की तैयारी” नीट की परीक्षा,पेपर लीक का सिलसिला, छात्रों का सड़क पर हंगामा और टीवी पर दुनिया भर की डिबेट..अजब सा नजारा हर चैनल पर दिख रहा था। बच्चों की मेहनत पर पेपर लीक का ऐसा कुठाराघात देखकर अफसोस भरा दिल अपने परीक्षा के दिनों को याद करने लगा।याद आने लगी परीक्षा की घड़ियां और वे सारी तैयारियां,जो परीक्षा के दिनों में हम हौस्टल में किया करते थे। हम लड़कियों का हौस्टल और एक्जाम का महीना–ये कॉम्बो किसी वेब सीरीज से कम नहीं था।जैसे ही परीक्षा क

Archana Anupriya
Jun 199 min read


"चांद कुमार के सपने"
"चांद कुमार के सपने" (एक व्यंग्यात्मक कहानी) चांद कुमार का जन्म ही ‘सपना’ देखने के लिए हुआ था। नाम भले चांद था, पर किस्मत धरती पर भी प्लॉट न दिला पाई।चांद कुमार जी जागते हुए सपने देखने में सिद्धहस्त थे।ऐसा कोई किरदार न था, जिसमें खुद को ढालकर चांद कुमार ने आनंद की अनुभूति न की हो।ये जो मेनिफेस्टेशन की अवधारणा चल पड़ी है आजकल की सोशल मीडिया पर, चांद कुमार जी स्वयं को इसके प्रणेता सिद्ध करने में लगे थे।हर दिन कुछ नया सोच लेते और फिर स्वयं को उसमें फिट करने की कोशिश में लग जाते

Archana Anupriya
Jun 144 min read


"रोपाई से विदाई तक: धान भी बदले घर,बेटी भी"
“रोपाई से विदाई तक: धान भी बदले घर, बेटी भी” “बेटी और धान, दोनों ही लक्ष्मी हैं, दोनों ही सृष्टि का आधार हैं और दोनों की किस्मत लगभग एक सी है – जन्म एक जगह, जीवन दूसरी जगह”--यह कथन पुरबिया किसान जगेसर काका की है। सुनने में अजीब जरूर लगता है लेकिन उनकी बात सचमुच पते की है। धान का बीज जहां डाला जाता है, पौधा उगने पर उसे वहीं नहीं रहने दिया जाता। उखाड़कर नए खेत में रोप दिया जाता है। बेटी भी जिस घर में जन्म लेती है, ब्याह के बाद उसे नया घर बसाना पड़ता है। दोनों का घर बदलता है, प

Archana Anupriya
May 165 min read
डायरी प्रियामन की..
कहीं रंग कहीं जंग कहीं ग्रहण दबंग क्या अजीब नजारा बन गया है जहान में.. कहीं बातें कहीं घातें कहीं रंग भरी रातें क्यों सितारों की जगह शोले दिखें आसमान में.. कहीं डर कहीं क्षर कहीं जल रहे घर क्यों हीनता संवेदना की भरी इंसान में ? ©अर्चना अनुप्रिया

Archana Anupriya
Mar 21 min read
"बदल रहा है समय"
“बदल रहा है समय..” बदलाव प्रकृति का नियम है और समय के साथ बदलना जरूरी भी है।चीजें बदलती रहती हैं.. और बदलना अच्छा भी है क्योंकि समय के साथ चलना जरूरी है।अगर पीछे छूट गये तो या तो पीड़ा होगी या पीड़ा देने लग जायेंगे।भगवान ने भी इस बात पर जोर दिया है कि समय के लिए ,धर्म के लिए,अपने कर्म के लिए बदलना ही चाहिए।खुद भगवान भी अलग-अलग युग में रूप बदल-बदलकर आये। समय के हिसाब से ही ईश्वर भी अपने अवतार में बदलाव करके आये।त्रेतायुगीन अवतार में राक्षसों द्वारा फैलायी अव्यवस्था को दूर करने क

Archana Anupriya
Jan 16 min read
"रोष प्रकृति का,दोष मनोवृत्ति का"
“रोष प्रकृति का,दोष मनुवृत्ति का” अभी उत्तराखंड के समाचार देखना शुरू ही किया था कि विज्ञापन आ गया।मन क्षुब्ध हो गया। फिर गूगल पर पढ़ना...

Archana Anupriya
Aug 8, 20254 min read
डायरी मन की--"हादसा? लापरवाही?साजिश?बदला?या संतुलन?"
हादसा? लापरवाही?साजिश? बदला?या संतुलन? आये दिन जो कुछ भी अच्छा या बुरा घटित होता है उसके पीछे मनुष्यों के कर्म उत्तरदायी हैं या ईश्वर की...

Archana Anupriya
Jun 14, 20254 min read
डायरी मन की-"अर्द्धशतक"
"अर्द्धशतक ” उम्र क्या है? गिनती है उन दिनों की, जिस दिन से हम इस धरती पर आए हैं। जो जितना पुराना होता जाएगा,वह जीवन का हर रुख उतना ही...

Archana Anupriya
Jun 6, 20252 min read


"हॉस्टल का खाना..क्या फिट था वो जमाना..!"
“हमारे हॉस्टल का खाना.. क्या फिट था वो जमाना..!” आज अचानक व्हाट्सएप पर हमारे हॉस्टल के खाने की बात चली तो एक अजीब मीठा सा अहसास मुँह में...

Archana Anupriya
May 13, 20244 min read


"अच्छा तो हम चलते हैं.."
“अच्छा.. तो हम चलते हैं..” (पुस्तक-मेला डायरी..१८/०२/२०२४) पुस्तक मेला विदा लेने को है..उत्साही उछलती मुस्कुराती किताबें थोड़ी बुझे मन से...

Archana Anupriya
Feb 18, 20242 min read
"मेरी वेलेंटाइन--किताबें"
"मेरी वेलेंटाइन--किताबें.." जब सरस्वती पूजा और प्रेम दिवस साथ-साथ आये तब पढ़ने पढ़ाने का उत्साह बढ़चढक़र आनंदित करता है...मेरे लिए तो किताबें...

Archana Anupriya
Feb 17, 20243 min read


"हाय ये मौसम..गर्मी में दे सर्दी का अहसास"
हर सर्दी में एक पोस्ट व्हाट्सएप पर बहुत बार आता रहता है.. “ ऐ ठंड इतना ना इतरा* हिम्मत है तो मई-जून में आ कर दिखा" इन्सानों के इस चैलेंज...

Archana Anupriya
May 4, 20231 min read
"उफ...ये गर्मी"
इस गरमी का क्या करें साहिब..गाड़ी अभी स्टार्ट ही हुई थी कि गियर सीधा चौथे नम्बर का लग गया।39-40 डिग्री तापमान दिखा रहा है दिल्ली के मौसम...

Archana Anupriya
Apr 20, 20233 min read


"जीने का सार...अपनाना या जानना"
किसी चीज को अपनाना और उसे जानना--दो अलग-अलग बातें हैं। जब हम किसी चीज को अपनाते हैं तो..बस अपनाते हैं।उसकीअच्छाइयाँ,बुराइयाँ,कीमत,उसके...

Archana Anupriya
Jul 19, 20222 min read


"जाने कहाँ गए वे रविवार"
" "राजूssss..बेटा ऊपर से बैग उतार दे न..जल्दी से सफाई करके नहाने जाऊँ..बाल भी धोने हैं,फिर खाना बनाने में देर हो जायेगी.." "आ रहा हूँ...

Archana Anupriya
Jun 19, 20225 min read


"अनोखा बंधन"
न जाने किस जन्म का कौन सा संबंध था भूरी का माँ के साथ कि हम तीन भाई-बहनों के साथ भूरी भी माँ की चौथी संतान बन गई थी। सफेद और काले रंग के...

Archana Anupriya
Jun 8, 20229 min read
Diary 1/03/2022
अच्छा लगता है जब अचानक किसी प्रतियोगिता में हिस्सा लेकर आप सफल होते हैं..भगवान भोलेनाथ के आशीर्वाद से "वीमेन आवाज मातृभाषा उन्नयन...

Archana Anupriya
Mar 2, 20221 min read


"हमारे हॉस्टल का शनिवार"
शनिवार का दिन.. कुछ खास था यह दिन हमारे हॉस्टल के लिए..इस दिन हॉस्टल में पढ़ाई का 'ऑफ डे' होता था यानि स्टडी-बेल नहीं होती थी।लड़कियों को...

Archana Anupriya
Feb 20, 20225 min read
मन की बात/25-12-2020
कहने को तो वर्ष के अंतिम हफ्ते से गुजर रहे हैं दिन…. पर देखा जाये तो वक्त अभी भी फरवरी-मार्च के महीने में ही भटक रहा है।ये ही वे दिन हैं...

Archana Anupriya
Dec 25, 20201 min read


"दहशत और अनुभवों का साल..2020"
जिंदगी में सब कुछ हमेशा एक सा नहीं रहता। हर पल, हर दिन, हर वर्ष कोई न कोई बदलाव होता रहता है- कभी अच्छा, सुकून भरा तो कभी बुरा, दहशत...

Archana Anupriya
Dec 23, 202013 min read
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