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भावों की चयनिका by Archana Anupriya

भावों की चयनिका
- Archana Anupriya
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"जीवन और पर्यावरण"
“जीवन और पर्यावरण” कल्पना कीजिए 2050 की गर्मी…तापमान 52°C से 60डिग्री सेल्सियस..आठ साल का कियान अपने दादू के साथ ‘सिटी सेंट्रल पार्क’ जाता है। बोर्ड पर लिखा था: Welcome to India’s Last Natural Tree — AC Zone Entry ₹500…कियान ने कांच के डोम के अंदर झांका। एक अकेला नीम का पेड़। उसके नीचे दादू बचपन में गिल्ली-डंडा खेलते थे। अब उसके चारों तरफ टिकट काउंटर, सेल्फी पॉइंट और Oxygen Bar था ..10 मिनट सांस लेने के पांच सौ रूपए। कियान पूछता है, "दादू, पेड़ तो फ्री में ऑक्सीजन देते थे न?

Archana Anupriya
Jun 67 min read


"अधिक आस्था तर्कशक्ति को क्षीण कर देती है"
"अधिक आस्था तर्कशक्ति को क्षीण कर देती है" आस्था,विश्वास,भक्ति तथा तर्क, विवेक,ज्ञान- ये सभी एक दूसरे के पूरक विचार हैं।बोलने,समझने और विश्लेषण की प्रक्रिया से गुजरते हुए सभी एक दूसरे से इस तरह से टकराते हैं कि असल अवधारणा कहीं और धरी रह जाती है और हम द्वंद्व और विवाद में फंसकर एक दूसरे पर आक्षेप करने में लग जाते हैं और भटकते रह जाते हैं। दरअसल,आस्था और तर्क विश्वास और विवेक के बीच की पतली रेखा है।तर्क दिमाग के माध्यम से चलता है और आस्था दिल को राह बनाती है। प्रश्न यह उठता

Archana Anupriya
May 307 min read
"मदर्स-डे स्पेशल.."मां की हथेली"
"मदर्स डे स्पेशल: "माँ की हथेली" सुबह छः बजे अनन्या की फ्लाइट थी..दिल्ली से बैंगलोर। हाथ में बोर्डिंग पास, दिल में धुकधुकी। माँ ने रात 3 बजे उठकर पराठे बना दिए थे.. "फ्लाइट में क्या खाएगी, बाहर का मत खाना।" अनन्या झुंझला गई थी, "माँ, मैं 28 की हूँ। एयरपोर्ट पर कैफे है।" माँ बस मुस्कुरा दी। टिफिन में पराठे, आम का अचार और गुड़ का टुकड़ा — "मीठा खाकर जाना, सफर अच्छा जाता है।" एयरपोर्ट पर माँ ने उसे गले लगाया। अनन्या को लगा माँ कुछ कमजोर हो गई हैं। कंधे थोड़े झुक गए हैं। पर माँ

Archana Anupriya
May 103 min read


"लुप्त होती धार्मिक परंपराएं"
“लुप्त होती धार्मिक परंपराएं” बदलते समय ने केवल समाज की व्यवस्था ही नहीं बदली है बल्कि, युगों से चले आ रहे धार्मिक रीति रिवाज और परंपराओं में भी बदलाव किया है। आजकल सनातन संस्कृति की चर्चा तो देश में जोर-शोर से हो रही है परंतु, सनातन संस्कृति के प्रतीक,धार्मिक रीति रिवाज और परंपराएं घटती जा रही हैं।सनातन के धार्मिक व्यवहार किसी विशेष पंथ से जुड़े नहीं हैं बल्कि ये मानव जीवन को बेहतर और संतुलित बनाने की प्रक्रिया हैं।यह वह रास्ता है,जो मानव जीवन के लिए हमेशा से जरुरी है और ह

Archana Anupriya
Feb 59 min read
"वकालत में महिलायें"
“भारतीय वकालत के क्षेत्र में स्त्रियों की भूमिका” भारतीय न्याय व्यवस्था देश के लोकतांत्रिक ढांचे की रीढ़ मानी जाती है, और इस व्यवस्था को मजबूत बनाने में महिलाओं की भूमिका आज अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रभावशाली बन चुकी है। एक समय था जब कानून और अदालतें पुरुष-प्रधान क्षेत्र मानी जाती थीं, लेकिन आज महिलाएँ न केवल इस क्षेत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही हैं, बल्कि नेतृत्व, संवेदनशीलता और नारीसुलभ दृष्टिकोण के साथ इसे अधिक मानवीय और संतुलित भी बना रही हैं। भारत में महिलाओं की वकालत

Archana Anupriya
Jan 65 min read
"ढाई अक्षर प्रेम के"
“ढाई अक्षर प्रेम के” अबकी श्रावण मास ने आते ही प्रेम के गुलाब बरसाये…पंखुड़ियां अभी भी मेरी रूह से चिपकी महक रही हैं।भोले बाबा ने इस...

Archana Anupriya
Aug 18, 20256 min read
"रक्षाबंधन"
"रक्षाबंधन" पूरे शहर में कर्फ्यू लगा था। सारी दुकानें बंद, स्कूल कॉलेज बंद... अजीब से हालात थे...यहाँ तक कि मंदिर-मस्जिद भी जाने की किसी...

Archana Anupriya
Aug 9, 20252 min read
"युवा पीढ़ी के भटकाव को रोक सकते हैं स्वामी विवेकानंद जी के विचार"
“ युवा पीढ़ी के भटकाव को रोक सकते हैं स्वामी विवेकानंद जी के विचार” आज दुनिया के हर माता-पिता को इस बात से शिकायत है कि उनके बच्चे उनकी...

Archana Anupriya
Jul 3, 20257 min read
"ठुकरा के मेरा प्यार "
*"ठुकरा के मेरा प्यार *"*- *एक समीक्षा** ठुकरा के मेरा प्यार सीरीज़ एक हिंदी ड्रामा है,जो डिज्नी+ हॉटस्टार पर दिखाया जा रहा है।इसका...

Archana Anupriya
Feb 24, 20254 min read


"सीने में जलन..."
“दिल्ली और प्रदूषण” सीने में जलन, आँखों में तूफ़ान सा क्यों है, इस शहर में हर शख़्स परेशान सा क्यों है...? 1978 में आई फिल्म 'गमन' का यह...

Archana Anupriya
Dec 2, 20247 min read
रील की बीमारी, रीयल जीवन पर भारी "
“रील की बीमारी,रीयल जीवन पर भारी" अभी हाल के दिनों में शिक्षक दिवस के अवसर पर एक अजीब सा वीडियो वायरल हो गया। किसी शिशु विद्यालय में...

Archana Anupriya
Nov 3, 20248 min read


"ओलम्पिक में भारतीय महिलाएं"
हर क्षेत्र में मजबूत कदम रखती और आत्मविश्वास के साथ सफलता की सीढ़ियां चढ़ती महिलाएं खेलकूद की दुनिया में भी तेजी से शीर्ष पर आती दिखने...

Archana Anupriya
Aug 30, 20249 min read
"सच्चा प्रेम और राधा-कृष्ण"
“सच्चा प्रेम और राधा-कृष्ण” प्रेम एक ऐसा विषय है जिसके ऊपर न जाने कितनी रचनाएं गढ़ी गई हैं,कितनी तरह से इसे परिभाषित किया गया है लेकिन आज...

Archana Anupriya
Aug 26, 202410 min read
"वो लास्ट सीन"
" वो लास्ट सीन.." "जीवन में कई मोड़ हैं, अपनी सुविधा के हिसाब से मुड़ जाना चाहिए यदि मंजिल ही लक्ष्य है तो.." पहाड़ की दुर्गम चढ़ाई...

Archana Anupriya
Aug 15, 20241 min read


"पारंपरिक खेल और क्रिकेट"
“पारंपरिक खेल और क्रिकेट” अंतिम गेंद पर जैसे ही बल्ला घूमा, फिल्डिंग करती भारतीय टीम के खिलाड़ी ने कैच लपक लिया और बैट्समैन आउट घोषित...

Archana Anupriya
Aug 1, 20249 min read


"रामचरितमानस एवं पंचतंत्र --वैश्विक धरोहर"
“रामचरितमानस एवं पंचतंत्र -वैश्विक धरोहर” किसी भी देश का विकास उसकी संस्कृतिक और साहित्यिक विकास के पैमाने से समझा जा सकता है।इधर हाल के...

Archana Anupriya
Jun 24, 20246 min read


"मतदान में महिलाएँ"
“मतदान में महिलाएं” 21वीं सदी आरंभ से ही महिलाओं की सदी रही है। पिछले वर्षों में महिलाओं का योगदान हर क्षेत्र में बढ़ा है। आर्थिक हो या...

Archana Anupriya
May 7, 20247 min read


"देशी फास्ट फूड-सत्तू"
"देशी फास्ट फूड- सत्तू" मैं शायद दस ग्यारह वर्ष की रही हूँगी.. एक सवेरे जब नींद खुली और कमरे से बाहर आयी तो देखा कि रसोई में दादी और माँ...

Archana Anupriya
Apr 15, 20245 min read


"बूढ़ा स्वाभिमान"
“बूढ़ा स्वाभिमान” कमली राशन लेकर घर लौट ही रही थी कि रास्ते में एक जगह भीड़ देखकर रुक गई।पूछने पर पता चला कि आज ‘महिला दिवस’ है और महिलाओं...

Archana Anupriya
Mar 17, 20244 min read


“विवाह संस्कार का बदलता स्वरूप”
“विवाह संस्कार का बदलता स्वरूप” अभी हाल ही में किसी फंक्शन में मेरे बचपन की एक सहेली मिल गई। बरसों बाद हम मिले थे लिहाजा, बड़ी ही...

Archana Anupriya
Mar 1, 20248 min read
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