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"राजा राम और मर्यादा पति की"

  • Writer: Archana Anupriya
    Archana Anupriya
  • Jan 21, 2024
  • 2 min read

"राजा राम और मर्यादा पति की"


एक कुशल योद्धा बन 

जीत गया था वह 

अन्याय से अंधकार से 

चूर चूर कर दिया था 

रावण का अहंकार 

हर अरि ने सिर झुकाया  

मानी थी अपनी हार…


एक सफल राजनीतिज्ञ की तरह 

सफलता कदमों में थी 

अनजान अज्ञात लोगों से 

जब उसने मित्रता की 

वानर सेना की तैयार 

अपनी शक्ति और सेना का 

सुदूर प्रदेशों तक किया विस्तार... 


एक आज्ञाकारी पुत्र की भांति 

बना विनम्रता की मिसाल 

माता पिता की एक इच्छा पर 

भूला राजगद्दी का सवाल 

वन की ओर निकल पड़ा 

चौदह बरसों के लिए 

राजपुत्र बन गया बनवासी 

अपने पिता के वचनों के लिए... 


एक पति और प्रेमी के रूप में 

सीता के प्रेम में 

शिव का धनुष तोड़ा 

अपने मन की कोमलता को

सीता की पवित्रता से जोड़ा 

आजन्म 'एक पत्नी' 

संकल्प निभाया

सीता की सुरक्षा के लिए

खाक छानी जंगलों की

शक्तिशाली रावण को 

मटियामेट कर डाला…

 

पर,कचोटती है 

मन को यह बात 

पति राम राजा राम से क्यों हारा?

क्यों ली सीता की अग्नि परीक्षा?

उन दोनों के प्रगाढ़ प्रेम में 

विश्वास की ऐसी कमी क्यों?

जनता में राजा का विश्वास 

मजबूत करने के लिए 

त्याग कर दिया पत्नी का 

सीता का साथ निभा कर 

पति पत्नी के बीच के

विश्वास को मजबूती क्यों नहीं दी?

हर क्षेत्र में मर्यादा स्थापित 

करने वाले पुरुषोत्तम राम ने 

पति की मर्यादा में 

दुर्बलता क्यों दिखाई ?

क्या पति राम राजा राम से डर गया? 

क्यों विवश था वह इतना 

कि पत्नी के परित्याग को अपनाया? 

क्या यह रचनाकार की मनःस्थिति है? 

या राजा राम की राजकीय महत्वाकांक्षा? 

प्रश्न अनसुलझे से है 

क्योंकि न्याय के पर्याय राम राज्य में 

नारी के प्रति स्वयं राम द्वारा 

किया गया है यह अन्याय तो स्पष्ट है 

ऐसे में एक गहन प्रश्न 

आंखों के आगे है.. 

"जब एक ही पुरुष राजा हो और पति भी 

और यदि किसी कारणवश 

पत्नी और जनता के बीच 

किसी एक को चुनना हो 

तो वह किसे चुने? 

क्या पत्नी को अपनाकर 

राजधर्म ठुकरा दे 

करोड़ों जनता को विवश छोड़ दे 

या राजधर्म के लिए 

करोड़ों जनता के पालन हेतु 

पत्नी का परित्याग करे? 

कहते हैं व्यक्ति से बड़ा परिवार 

परिवार से बड़ा समाज और 

समाज से बड़ा है देश 

राजधर्म की खातिर 

पत्नी का परित्याग और 

स्वयं के सुखों की बलि देकर 

क्या राम ने राजधर्म के 

संस्कारों की मर्यादा निभाई? 

सारे प्रश्न अधूरे से हैं, अनसुलझे हैं 

स्पष्ट है तो बस यह तथ्य 

कि देश और समाज 

बड़ा और महत्वपूर्ण है 

किसी भी व्यक्ति से, 

हर रिश्ते से, 

हर ओहदे से

क्योंकि निहित है उसमें 

मनुष्यों का बाहुल्य 

और मानवता का उद्धार 

राम ने रिश्ते से 

अधिक अहमियत दी 

मानवता और समाज को

अनन्य प्रेम से भरा रिश्ता

उनका सीता से

कमजोरी नहीं,शक्ति बना 

इसीलिए वे 

मर्यादा पुरुषोत्तम हैं, 

अवतार हैं...।

अर्चना अनुप्रिया


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