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20 दिसम्बर,2020

  • Writer: Archana Anupriya
    Archana Anupriya
  • Dec 20, 2020
  • 1 min read

रविवार की शाम एक सुखद अहसास लेकर आयी जब कोरोना की दहशत के बीच अंतरा शब्दशक्ति प्रकाशन ने मध्यप्रदेश के वारासिवनी में डिजिटली लाईव आकर मेरे दूसरे काव्य-संग्रह "वामा-लोक",जिसमें स्त्री-विमर्श की कविताएँ समाह्रत हैं,का विमोचन अन्य पुस्तकों के साथ एक भव्य समारोह आयोजित करके किया।इसी समारोह में कुछ अन्य रचनाकारों के साथ मुझे भी "साहित्य साधक सम्मान" से सम्मानित किया गया,जिसके अंतर्गत ट्राफी,प्रमाणपत्र और ₹1500/- प्रदान किए गए। हम सब इस समारोह में लिंक के जरिये लाईव होकर शामिल हुए।इससे पहले,वर्ष 2020 के आरंभ में मेरी पुस्तक"और खामोशी बोल पड़ी" का विमोचन वनिका प्रकाशन द्वारा विश्व पुस्तक मेले में मूर्धन्य साहित्यकारों द्वारा किया गया था।इस दृष्टि से यह डराने वाला वर्ष 2020, मेरे लिए दो पुस्तकों की उपलब्धियों का वर्ष बन गया। सचमुच,अँधेरे में ही कहीं सूरज छिपा होता है।

साहित्य के क्षेत्र में लेखन,प्रकाशन, विमोचन--एक ऐसी प्रक्रिया है,जो हमेशा लेखकों और पाठकों को सकारात्मकता के दर्शन कराती है।वैसे तो इस समारोह का आयोजन मई-जून में होना निश्चित हुआ था,परन्तु कोविड-19 ने वर्ष 2020 को कुछ यूँ परेशान किया कि सारी तय चीजें उलट-पुलट हो गयीं। ऐसे में पुस्तक का विमोचन और सम्मान की ट्रॉफी,जो जल्द ही डाक से मुझ तक पहुँचने वाली है,किसी खुशबू भरी बयार की तरह अंतर्मन को शीतल कर रही है।

प्रीति जी का धन्यवाद कि उन्होंने इस मुश्किल दौर में हम तक ये खुशियाँ पहुँचायीं।आप पाठकों का भी अनेकानेक वंदन,जिन्होंने हमेशा मेरा हौसला बढ़ाया है। पुस्तक के विषय में पुस्तक और ट्राफी मिलने पर साझा करूँगी।

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