कहीं रंग कहीं जंग कहीं ग्रहण दबंग क्या अजीब नजारा बन गया है जहान में.. कहीं बातें कहीं घातें कहीं रंग भरी रातें क्यों सितारों की जगह शोले दिखें आसमान में.. कहीं डर कहीं क्षर कहीं जल रहे घर क्यों हीनता
“बदल रहा है समय..” बदलाव प्रकृति का नियम है और समय के साथ बदलना जरूरी भी है।चीजें बदलती रहती हैं.. और बदलना अच्छा भी है क्योंकि समय के साथ चलना जरूरी है।अगर पीछे छूट गये तो या तो पीड़ा होगी या पीड़ा देन
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