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"चांद कुमार के सपने"

  • Writer: Archana Anupriya
    Archana Anupriya
  • 1 day ago
  • 4 min read

"चांद कुमार के सपने" 

(एक व्यंग्यात्मक कहानी)


चांद कुमार का जन्म ही ‘सपना’ देखने के लिए हुआ था। नाम भले चांद था, पर किस्मत धरती पर भी प्लॉट न दिला पाई।चांद कुमार जी जागते हुए सपने देखने में सिद्धहस्त थे।ऐसा कोई किरदार न था, जिसमें खुद को ढालकर चांद कुमार ने आनंद की अनुभूति न की हो।ये जो मेनिफेस्टेशन की अवधारणा चल पड़ी है आजकल की सोशल मीडिया पर, चांद कुमार जी स्वयं को इसके प्रणेता सिद्ध करने में लगे थे।हर दिन कुछ नया सोच लेते और फिर स्वयं को उसमें फिट करने की कोशिश में लग जाते।सरकारी नौकरी तो उनके लिए चुटकी बजाने जितना आसान काम लगता था। ग्रेजुएशन थर्ड डिवीजन से पास करते ही चांद कुमार ने ऐलान कर दिया, "अब तो बस कलेक्टर बनना है।" मोहल्ले भर में मिठाई बंटी। पापा ने छाती चौड़ी करके कहा, "हमारा चांद अब अफसर बनेगा।" छः साल की तैयारी,चालीस प्रकार के फॉर्म, तीन लाख की कोचिंग और दो बार प्रीलिम्स क्लियर।चांद कुमार अनुभवी प्रतियोगी बन चुके थे। किसी सरकारी नौकरी के इंटरव्यू में पूछा गया, "चांद पर पहला कदम किसने रखा?"  

चांद कुमार बोला, "सर, नील आर्मस्ट्रांग। पर सर, चांद पर प्लॉट कितने का मिलेगा,वो तो बता दो। नौकरी तो मिलनी नहीं।" इंटरव्यूअर ने हँसकर कहा, "बेटा, तुम व्यंग्य लिखो। देश-सेवा तुम्हारे बस की नहीं।" अगले दिन से चांद कुमार को कलेक्टर की नौकरी क्या, हर सरकारी नौकरी में दाग ही दाग दिखने लगे।नौकरशाही में भ्रष्टाचार के बड़े-बड़े पर्वत उगे हुए थे,जो अब जाकर चांद कुमार को नजर आये। कलक्टर न बनकर और सरकारी नौकरी न करके वह भ्रष्टाचारी बनने से बाल-बाल बचे।

उस रात चांद कुमार ने सपने में स्वयं को YouTube से करोड़पति बनते हुए देखा।नौकरी गई भाड़ में, चांद कुमार ने सुबह उठते ही फोन उठाया।खुद का एक चैनल बनाया और  चैनल का नाम रखा…”Chand Kumar Vlogs”।  

अगले ही दिन वीडियो बना डाला.."दोस्तों,आज मैं दिखाऊंगा कैसे  हम जीरो रुपये में बिजनेस शुरू करें।" व्यूज़ आए 17,सब्सक्राइबर 9,उनमें 7 थे घर वाले। लेकिन,चांद कुमार ने स्वयं ही अपने प्रयास को सराहा और दूसरा वीडियो बनाने में लग गये।दूसरा वीडियो बनाया.."मेरी सरकारी नौकरी क्यों नहीं लगी… सिस्टिम एक्सपोज़्ड"। सब्सक्राइबर तो छोड़िए,कमेंट में आया.."भाई, पहले स्पेलिंग तो सीख ले। System होता है, सिस्टिम नहीं।" चांद कुमार ने पिन्ड कमेंट किया.. "Haters will hate. मैं तो फ्यूचर TEDx स्पीकर हूँ।" चांद कुमार बिंदास होकर वीडियो बनाने में लगे रहे।

छःमहीने बाद यूट्यूब से कमाई आयी..₹23..चांद कुमार ने स्टेटस लगाया: "Success is not money, it’s journey." चांद कुमार के पापा बोले "बेटा, जर्नी के साथ-साथ आटा-दाल भी ले आया कर।"

चांद कुमार ने अपनी जर्नी में आगे स्टार्टअप स्टार्ट करने की सोची।आखिर सरकार भी तो यही चाहती है नयी पीढ़ी से करवाना।यूनिकॉर्न और YouTube से पेट नहीं भरा तो चांद कुमार ने लिंक्डइन प्रोफाइल अपडेट की..”Founder & CEO @ ChandaMama Innovations” आइडिया था,"ऐसा ऐप जो लोगों को बताए कि वो सपना देख रहे हैं या हकीकत में हैं।" उन्हें अपना यह आइडिया बहुत नया और जबरदस्त लगा।अब वह इन्वेस्टर ढ़ूंढ़ने में लगे।इन्वेस्टर को स्पिच दी…"सर, भारत में 140 करोड़ लोग हैं। अगर 1% ने भी ऐप डाउनलोड किया तो..."  

इन्वेस्टर ने कहा,"बेटा, पहले तो तू चेक कर ले कि तू अभी सपना देख रहा है या हकीकत में बेरोजगार है।" बहुत प्रयास के बाद भी फंडिंग मिली, जीरो।चांद कुमार ने पोस्ट लिखा: "Rejected by investors, selected by universe."


इधर घर में दादा,दादी, नाना-नानी सभी लगे थे कि उनके जीते जी चांद कुमार की शादी हो जाये।जब घर में यह दवाब बढ़ने लगा तो चांद कुमार को एक नया आइडिया आया,.. विवाह डौट कौम पर वह IAS दुल्हन ढ़ूंढ़ने में लग गए। मां जब बोली, "बेटा, अब बस कर, बहू ले आ" तो चांद कुमार ने विवाह डौट कौम पर प्रोफाइल बनाई.. Income..5-7 LPA (Projected), Profession..Entrepreneur, Visionary।रिश्ता आया भी  IAS लड़की का। लड़की के पापा ने पूछा, "बेटा, करते क्या हो?" चांद बोला, "अंकल, मैं फ्यूचर बिल्ड कर रहा हूँ। अभी रेवेन्यू नहीं आया है, पर विजन क्लियर है।" अंकल बोले, "बेटा, विजन से राशन नहीं आता। पहले अपना फ्यूचर बिल्ड करो,हमारी बेटी का फ्यूचर मत बिगाड़ो।" रिश्ता कैंसिल। चांद कुमार ने ट्वीट किया.. "Indian society doesn’t support risk takers.


अब चांद कुमार नौकरी और व्यवसाय की नकारात्मकता से काफी हद तक आगाह हो चुके थे।अक्सर उनका मन उन्हें देशप्रेम के लिए प्रेरित करता ।उन्हें समझ आ गया था कि बिना देश से भ्रष्टाचार हटाये,उनके जैसे लोगों के सपने पूरे नहीं हो सकते।सो,वह अब राजनीति में एंट्री लेने की बात पर विचार करने लग गये। सरकार भी तो युवाओं को राजनीति में आगे आने के लिए कह रही है।तो अब जब कुछ न बचा तो चांद कुमार ने राजनीति में जाने का तय किया। उन्हें पता था कि राजनीति में तो उन जैसे लोगों का ही जबरदस्त फ्यूचर है।उन्होंने फौरन एक सफेद कुर्ता और रंगीन बंडी सिलवाया।व्हाट्सऐप DP पर लगा दिया..Yuva Neta, Soch Nayi..।  

नारा दिया.."न नौकरी दूंगा, न करने दूंगा…सबको स्टार्टअप दूंगा।" चांद कुमार मोहल्ले के चुनाव में खड़े हुए। वादा किया कि "हर घर में AC देंगे और हर हाथ में iPhone होगा। चुनाव हुआ और वोट मिले 11..ज़मानत जब्त।हार के बाद चांद कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की.."EVM हैक है…जनता अभी मेरी सोच के लिए तैयार नहीं।" पापा टीवी बंद करते हुए बोले.."बेटा, जनता तो तैयार है, तू रिजल्ट के लिए तैयार नहीं।"

आज की तारीख में चांद कुमार पैंतीस साल का है। इंस्टा पर बायोडाटा अब भी है..Public Figure, Dreamer,Believer,#Hustle…  

अब मत पूछिए कि वह काम क्या करता है?  

सुबह पापा की दुकान पर बैठता है, दोपहर को मोटिवेशनल रील बनाता है.."दोस्तों, कभी हार मत मानो।" कमेंट में आता है: "भाई तू तो खुद ही उदाहरण है हार न मानने का... और जीत न पाने का भी।" रात को छत पर लेटकर असली चांद को देखता है और मन ही मन में बुदबुदाता है "बेगैरत, तू तो पहुंच से बाहर है ही, तेरे नाम वाले सपने भी।"

मोहल्ले के बच्चे अब उसे ‘चांद अंकल’ नहीं, ‘Startup Uncle’ बुलाते हैं।और चांद कुमार? वो अब भी नया सपना डाउनलोड कर रहा है... इस बार AI सिखाने का कोर्स और नयी पीढ़ी को हार न मानने का मोटिवेशन देने के लिए पौडकास्ट करने के सपने पर काम चल रहा है क्योंकि सपने देखना फ्री है और फ्री में चांद कुमार को महारत हासिल है।

देखा जाए तो,इस देश में चांद कुमार लाखों हैं। फर्क बस इतना है कि कुछ चांद पर पहुँचने के लिए रॉकेट बनाते हैं, और कुछ सिर्फ चांदनी चौक तक का प्लान बनाकर,अपनी सेल्फी खींचकर रील डाल देते हैं।बाकी तो सब ठीक ही है। सिस्टम चल रहा है और चांद कुमारों के सपने भी। बस नौकरी, शादी और सक्सेस... वो Loading...पर अटके गोल-गोल घूम रहे हैं।

                   ©अर्चना अनुप्रिया 

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