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जुलाई 26/2020

  • Writer: Archana Anupriya
    Archana Anupriya
  • Jul 26, 2020
  • 1 min read

मनुष्य एक संवेदनशील सामाजिक प्राणी है और उम्मीदों पर ही जिंदा है..उम्मीदें चाहे अपनी जिंदगी से हो या किसी और से। रिश्ते मनुष्य के जीवन की धूरी हैं..रिश्ता दोस्ती का हो या पारिवारिक, इन्सान को जीने की वजह देता है, इसीलिए रिश्तों में अपेक्षाएँ स्वाभाविक हैं।जब आदमी सुखी हो तो अपेक्षा रहती है कि उसके दोस्त, परिवार खुश हों, जब वह दुःखी होता है तो अपेक्षा होती है कि कोई उसका दुःख बाँटे। अगर कोई किसी के लिए कुछ करता है तो बदले में कुछ पाने की भी अपेक्षा करता है।परन्तु, इन्सान की यही अपेक्षाएँ उनके आपसी रिश्तों में कड़वाहट लाने के लिए भी उत्तरदायी होती हैं।अपेक्षा के मुताबिक यदि सामने वाले का व्यवहार नहीं हुआ तो मन दुःखी होता है जो कालांतर में मनमुटाव का कारण बनता है।शायद इसीलिए पूर्वजों ने कहावत बनायी है.."नेकी कर , दरिया में डाल"...अर्थात्.... किसी से अपेक्षा नहीं करते हुए अपना कर्तव्य करने की बात कही गई है। यही ठीक भी है..हालांकि, प्यार और आदर की अपेक्षा तो कम से कम रहती ही है परन्तु बदलते हालात में इतनी थोड़ी सी अपेक्षा भी रिश्तों में दरार का कारण बन रही है। इसीलिए बेहतर और सुरक्षित तरीका यही है कि बिना किसी अपेक्षा के रिश्तों में अपना कर्तव्य पूरा करते रहें... अगर सभी यही सोच रखें, तो आपसी कड़वाहट से बचा जा सकता है।

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