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भावों की चयनिका by Archana Anupriya

भावों की चयनिका
- Archana Anupriya
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प्रेमचंद जी पर परसाई जी का लेख
आज प्रेमचन्द जयंती के अवसर पर परसाई जी का एक लेख प्रेमचंद का एक चित्र मेरे सामने है, पत्नी के साथ फोटो खिंचा रहे हैं। सर पर किसी मोटे...

Archana Anupriya
Jul 31, 20205 min read
"और खामोशी बोल पड़ी"-समीक्षा - डॉ. प्रणव भारती
अभिभूत हूँ कि वरिष्ठ रचनाकार आदरणीया प्रणव भारती दीदी ने मेरी पुस्तक "और खामोशी बोल पड़ी" की बहुत ही खूबसूरत समीक्षा लिखी है। धन्यवाद...

Archana Anupriya
Jul 28, 20209 min read
"जीने का सार...अपनाना या जानना"
किसी चीज को अपनाना और उसे जानना--दो अलग-अलग बातें हैं। जब हम किसी चीज को अपनाते हैं तो..बस अपनाते हैं।उसकीअच्छाइयाँ,बुराइयाँ,कीमत,उसके...

Archana Anupriya
Jul 28, 20202 min read
"गरबा"
सुबह से ही परेशान थी रितु।कल शाम को ही डॉक्टर को दिखाया था...जांच के लिए सैंपल दिए गए थे। आज रिपोर्ट आने वाली थी... "अगर कुछ ऐसी वैसी...

Archana Anupriya
Jul 28, 20203 min read


प्रकृति
प्रकृति हमारी माँ है और हमारे जीवन के अलावा असंख्य वरदान हम इस माँ से पाते रहे हैं। परंतु, कभी हम इस बात पर भी विचार करें कि हमने प्रकृति...

Archana Anupriya
Jul 19, 20201 min read
फरवरी 14/ 2020
जिंदगी दिनों, महीनों, सालों का सफर नहीं, यादों का सफर है।तमाम उम्र यादों का एक काफिला हमारे साथ चलता है।असंख्य यादों में कुछ मीठी सी...

Archana Anupriya
Jul 18, 20201 min read


"बदला"
आज ठाकुर साहब के पैरों के नीचे की जमीन खिसक गई थी।उनके खुद के बेटे-बहू ने चालाकी से सारी जमीनें एक ऐसे शख्स को मोटी रकम में बेच दी थीं,...

Archana Anupriya
Jun 19, 20201 min read


कुन्नूर की वादियों में फिल्टर कॉफी
भीगा-भीगा मौसम, मंद-मंद चलती शीतल हवा,चारों ओर हरे-भरे पहाड़ और घाटियाँ, घाटियों के बीच से गुजरती टॉय-ट्रेन और हाथ में गरमागरम फिल्टर कॉफी...

Archana Anupriya
Jun 18, 20202 min read


दो जून की रोटी
शम्भु बन गया प्रेरणा

Archana Anupriya
Jun 15, 20201 min read


घर
ज्योति ने एक बार फिर सारे कमरों का बड़ी गहराई से मुआयना किया। हर चीज अपनी जगह खिल रही थी। सारा घर किसी फाइव स्टार होटल के सुसज्जित कमरों...
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Jun 14, 20209 min read
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