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भावों की चयनिका by Archana Anupriya

भावों की चयनिका
- Archana Anupriya
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जश्न
लघुकथा

Archana Anupriya
Aug 15, 20201 min read



Archana Anupriya
Aug 12, 20200 min read


"बंसी"
बांस की एक पतली सी डंडी कई छेदों के घाव लिए दर्द में पुकारती है जब अपने प्रेम परमेश्वर को साँसें बज उठती हैं उसकी धुन लहराने लगती है...

Archana Anupriya
Aug 12, 20201 min read



Archana Anupriya
Aug 11, 20200 min read


"श्री राम से शिकायत, दीपावली के चाँद की"
दीपावली की वह अद्भुत रात थी श्री राम के अयोध्या वापसी की बात थी.. सारी धरा खुशियों से भरी थी हर तरफ जलते दीपों की लड़ी थी.. प्रसन्नता भरे...

Archana Anupriya
Aug 5, 20201 min read
नया आदमी
आदमी पहले मशीन था दिन-रात दौड़ता भागता पत्थरों से बनीं थीं धड़कनें निष्प्राण,संवेदनहीन, बनावटी विधाता ने बंद कर लिए दरवाजे तन्हाई में फूटने...

Archana Anupriya
Aug 1, 20201 min read
प्रेमचंद- "मानसरोवर" का "हंस"
मिट्टी से जुड़ा एक विराट व्यक्तित्व दुनिया को सुनाता मिट्टी का दर्द हिन्दी-उर्दू बहनों को आपस में गले मिलाता पैबन्द से निकली धारदार...

Archana Anupriya
Jul 31, 20201 min read


प्रेमचंद जी पर परसाई जी का लेख
आज प्रेमचन्द जयंती के अवसर पर परसाई जी का एक लेख प्रेमचंद का एक चित्र मेरे सामने है, पत्नी के साथ फोटो खिंचा रहे हैं। सर पर किसी मोटे...

Archana Anupriya
Jul 31, 20205 min read
एक पाती स्वयं के नाम"28/07/2020
मेरी प्रिय सहेली, बहुत सारा स्नेह उम्मीद करती हूँ कि स्वयं को पत्र लिखते हुए तुम्हें बहुत खुशी हो रही होगी।खुद से की हुई बातों को शब्दों...

Archana Anupriya
Jul 29, 20202 min read
"और खामोशी बोल पड़ी"-समीक्षा - डॉ. प्रणव भारती
अभिभूत हूँ कि वरिष्ठ रचनाकार आदरणीया प्रणव भारती दीदी ने मेरी पुस्तक "और खामोशी बोल पड़ी" की बहुत ही खूबसूरत समीक्षा लिखी है। धन्यवाद...

Archana Anupriya
Jul 28, 20209 min read
"जीने का सार...अपनाना या जानना"
किसी चीज को अपनाना और उसे जानना--दो अलग-अलग बातें हैं। जब हम किसी चीज को अपनाते हैं तो..बस अपनाते हैं।उसकीअच्छाइयाँ,बुराइयाँ,कीमत,उसके...

Archana Anupriya
Jul 28, 20202 min read
"गरबा"
सुबह से ही परेशान थी रितु।कल शाम को ही डॉक्टर को दिखाया था...जांच के लिए सैंपल दिए गए थे। आज रिपोर्ट आने वाली थी... "अगर कुछ ऐसी वैसी...

Archana Anupriya
Jul 28, 20203 min read
“आईना”
कल जब मैंने आईना देखा, खुद को बहुत परेशाँ देखा.. थी बालों में सफेदी, और, गालों पर झुर्रियां… सोचने लगी मैं-”हाssयय ! ये मेरा अक्स है...

Archana Anupriya
Jul 26, 20201 min read
“यादें”
दबे पाँव चली आती हैं यादें, जब भी अकेली होती हूँ… मन को साथ ले जाती हैं, उन किरदारों के बीच जो मेरे वजूद का हिस्सा रहे हैं.. मन को कुरेद...

Archana Anupriya
Jul 26, 20201 min read
जुलाई 26/2020
मनुष्य एक संवेदनशील सामाजिक प्राणी है और उम्मीदों पर ही जिंदा है..उम्मीदें चाहे अपनी जिंदगी से हो या किसी और से। रिश्ते मनुष्य के जीवन की...

Archana Anupriya
Jul 26, 20201 min read
उलझन
मकड़ी की जाली सी उलझनें हैं जिंदगी की न जाने कौन सा सिरा कहाँ से शुरू होकर कहाँ खत्म हो जाता है कभी परेशान करता है मन कभी सुलझा देता है...

Archana Anupriya
Jul 26, 20201 min read
काल
सुनाई नहीं देती काल के कदमों की चाप पर हर पल महसूस होती है कण-कण पर इसकी थाप.. सुख और दुख,हँसीऔर गम समय की सभी लीला ही तो है बेपनाह...

Archana Anupriya
Jul 26, 20201 min read
“आँसू की आप बीती”
व्यथा की लहरों से निकलकर खड़ा था नयनों के द्वार पे, बंद थे पलकों के दरवाजे था खुलने के इंतजार में.. टूटकर सपना बिखर गया था ह्रदय में किसी...

Archana Anupriya
Jul 25, 20201 min read
मन का साथी-किताब
थके से मन को मेरे सुकून देती हैं किताबें यादों, सपनों, ख्यालों का हुजूम हैं किताबें… ऊब जाता है मन जब दुनिया के स्वार्थी आचरण से उलझ जाता...

Archana Anupriya
Jul 25, 20201 min read
प्यारा खत
साड़ी की तहों के बीच, एक खत पुराना मिला… यादों के दरवाजे खोल कर, वो गुजरा हुआ जमाना मिला… बिखर गए मोती बीते लम्हों के, उन्हीं में वह खोया...

Archana Anupriya
Jul 25, 20201 min read
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