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भावों की चयनिका by Archana Anupriya

भावों की चयनिका
- Archana Anupriya
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"अपनों की परख"
जीवन के इम्तिहान में छल से भरे जहान में अपनों की होती है परख दुःखों के आसमान में… जब साथ में समय न हो क्या होगा आगे तय न हो तब वक्त की...

Archana Anupriya
Jul 23, 20201 min read
माँ का पद
जीवन के उतार-चढ़ाव भरे रास्तों में एक पद ऐसा भी है इस संसार में जिसकी प्रतिष्ठा की खातिर वो ईश्वर भी अत्यंत आतुर हैं और नम्र हैं व्यवहार...

Archana Anupriya
Jul 23, 20201 min read


हे शिव शंकर
ना आदि है, ना अंत है, सीमाएं भी अनंत हैं, हैं "ऊँ" के आकार में, जिनसे सृष्टि जीवन्त है। हर काल के कपाल हैं, हम सबके महाकाल हैं, विभोर...

Archana Anupriya
Jul 20, 20201 min read
"बहू"
दो घरों के बीच अहसासों से बुनी सेतु बनी मैं मायका और ससुराल… दो भिन्न परिवारों को मर्यादा और प्यार की अटूट कड़ी से जोड़ा मैंने मानवता हुई...

Archana Anupriya
Jul 20, 20201 min read
"सरहदें"
कितना अच्छा हो यदि हर सरहद पर तैनात हों फौजियों,गोलियों,टैंकों की जगह सूर, तुलसी,मीर,गालिब,फैज और जंगें हुआ करें महज...

Archana Anupriya
Jul 20, 20201 min read
"रिश्ता अनाम सा"
एक रिश्ता अनाम सा धरती और आकाश के बीच सृष्टि के आरंभ से ही पनपता,परिपक्व होता क्षितिज पर कहीं मिल कर भी नहीं मिल पाते हैं दोनों एक अनबुझ...

Archana Anupriya
Jul 20, 20201 min read
"कर्म की गठरी"
गठरी लादे कर्मों की चल रहा हर इंसान पोटली पाप और पुण्य की बस खोलेंगे भगवान.. बदल जाएगा क्षण में सब कुछ भाग्य, तकदीर, हाथों की लकीरें...

Archana Anupriya
Jul 20, 20201 min read


प्रकृति
प्रकृति हमारी माँ है और हमारे जीवन के अलावा असंख्य वरदान हम इस माँ से पाते रहे हैं। परंतु, कभी हम इस बात पर भी विचार करें कि हमने प्रकृति...

Archana Anupriya
Jul 19, 20201 min read



Archana Anupriya
Jul 19, 20200 min read



Archana Anupriya
Jul 19, 20200 min read


मेरी कलम
मेरी कलम की नोंक
जब शब्दों का जहान रचती है

Archana Anupriya
Jul 18, 20201 min read



Archana Anupriya
Jul 18, 20200 min read


जुलाई 12/2020
ढलती शाम का सुर्ख आसमान... धरती से गले मिलता, थोड़ा लजाता...चारों ओर रंग-बिरंगी छटा..मानो किसी बच्चे ने खाली कैनवास पर रंग बिखेर दिये...

Archana Anupriya
Jul 18, 20201 min read


जून 10/ 2020
"बेबस, बेचारा कान" पहले चश्मा और अब मास्क - खूँटी ही समझ लिया है क्या तुम सबने..? मुँह तो ढककर बचा लेते हो पर हमारा क्या..?उफ्फ्फ.....

Archana Anupriya
Jul 18, 20201 min read


मई 9/ 2020
"चाँद से गुफ्तगू" कल पूनम के चांद पर मन जा अटका। बड़ी सी गोल बिंदी जैसा... प्रकृति मानो सितारों से भरी चुनरी पहने,बड़ी सी बिंदी लगाए मुझे...

Archana Anupriya
Jul 18, 20203 min read
जून 21/ 2020
11:30 PM हवा में उड़ती हुई छवियाँ एक छोटे से आयताकार डिवाइस में आकर एक दूसरे से मिलीं और हवा में कोई खुशबू सी फैल गयी...ऐसा लगा मानो हम...

Archana Anupriya
Jul 18, 20202 min read
फरवरी 14/ 2020
जिंदगी दिनों, महीनों, सालों का सफर नहीं, यादों का सफर है।तमाम उम्र यादों का एक काफिला हमारे साथ चलता है।असंख्य यादों में कुछ मीठी सी...

Archana Anupriya
Jul 18, 20201 min read



Archana Anupriya
Jul 15, 20200 min read



Archana Anupriya
Jul 15, 20200 min read


"बदला"
आज ठाकुर साहब के पैरों के नीचे की जमीन खिसक गई थी।उनके खुद के बेटे-बहू ने चालाकी से सारी जमीनें एक ऐसे शख्स को मोटी रकम में बेच दी थीं,...

Archana Anupriya
Jun 19, 20201 min read
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